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सोहबत-ए-शब - my late night companions

 1 حالِ عالم کچھ یوں نظر آتا ہے، تمام بے صبر دفن ہوئے ہیں اور بدنصیب بے قبر بھٹک رہے ہیں۔ हाल-ए-आलम कुछ यूँ नज़र आता है, तमाम बेसब्र दफ़्न हुए हैं और बदनसीब बे-क़ब्र भटक रहे हैं। 2 حج میں بھگدڑ مچی تو انگلی اٹھی عقیدت پر، اور ہر طرف سناٹا تھا جب ہزاروں جوان مرنے چلے جنگ میں۔ हज्ज में भगदड़ मची तो उंगली उठी अकीदत पर, और हर तरफ़ सन्नाटा था जब हज़ारों जवान मरने चले जंग में। 3 ہر انگوٹھی بس ایک صفر ہے، سونے سے گھرا ایک خالی پن۔ پہن تو کوئی بھی لے، سجے تو تب جب پہننے کی وجہ ہو۔ हर अंगूठी बस एक सिफ़र है, सोने से घिरा एक ख़ालीपन। पहन तो कोई भी ले, सजे तो तब जब पहनने की वजह हो। 4 خیال ایسے ایسے ہیں کہ نیند نہیں آتی، یہ وہ دوست ہیں جو شام ڈھلتے ہی چلے آتے ہیں۔ ख़याल ऐसे ऐसे हैं कि नींद नहीं आती, ये वो दोस्त हैं जो शाम ढलते ही चले आते हैं। 5 دریافت و سیاحت طور ہے خود شناسی کے، وقت گزرتا گیا، میں خودی کو پاتا گیا۔ اب ہر طرف میں ہی میں ہوں اور ایک لمحہ بھی نہیں ساتھ۔ दरयाफ़्त-ओ-सियाहत तौर है ख़ुद-शनासी के, वक़्त गुज़रता गया, मैं ख़ुदी को पाता गया। अब हर तरफ़ मैं ही मैं...

खुशनसीबी - the blessing

  خوش نصیب ہیں ہم جو انہیں خوشی دینے کا نصیب ملا۔ کہ خود سے محبت ہونے لگی ہے، ہمیں ایسا حبیب ملا۔ ایسا یار بخشا تقدیر نے ہم پر، کہ غیروں میں اب نہ کوئی رقیب ملا۔ ख़ुशनसीब हैं हम जो उन्हें ख़ुशी देने का नसीब मिला। कि ख़ुद से मोहब्बत होने लगी है, हमें ऐसा हबीब मिला। ऐसा यार बख़्शा तक़दीर ने हम पर, कि ग़ैरों में अब न कोई रक़ीब मिला।

चंद अशआर - a few distractions (1)

1 تجھے بھول نہ پایا، خدا قسم، کوشش تو بہت کی کمبخت! یہ یاد بھی تو رکھنا تھا کہ بھلانا کس کو ہے۔ तुझे भूल न पाया, ख़ुदा कसम, कोशिश तो बहुत की कमबख़्त! ये याद भी तो रखना था कि भुलाना किसको है। 2 غلطی سے ہی سہی، آپ نے ہمیں یاد تو کیا، ورنہ آج کل تو لوگ یاد سے بھلا دیتے ہیں۔ ग़लती से ही सही, आपने हमें याद तो किया, वरना आजकल तो लोग याद से भुला देते हैं। 3 زندگی میں صرف ایسی صبح ہو، ہر صبح تم سے شروع ہو۔ دل و جان میلوں دور کیوں نہ ہو، روح مگر روبرو ہو۔ ज़िंदगी में सिर्फ़ ऐसी सुबह हो, हर सुबह तुमसे शुरू हो। दिल-ओ-जान मीलों दूर क्यूँ न हो, रूह मगर रू-ब-रू हो।

परेशानी - the dilemma

ए मेरे दिल तू आज परेशान क्यूं है   तू तो हर दम उनकी खुशी चाहता था आज उन्हें खुश देखकर हैरान क्यूं है ए मेरे दिल...   जिस सपनॊं का महल तूने अपने अरमानॊं से सजाया था आज वहीं पर खुद मेहमान क्यूं है ए मेरे दिल...   जिनसे हर दिन यह नज़र अजनबी बनकर मिलना चाहती थी आज वही नज़र उनके लिये अनजान क्यूं है ए मेरे दिल...   जिस प्यार के लिये मॊल ली थी सारी दुनिया से दुशमनी आज उसी प्यार के लिये सारी दुशमनी कुर्बान क्यूं है ए मेरे दिल...

कमी - the missing link

  यह जान न पाये कि आप आखिर चाह्ते क्या हैं, शायद हमारी चाहत में ही कुछ कमी थी।   सपने दिखाकर रिझाना हमारी फ़ितरत में नहीं, शायद हमारी बातॊं में हकीकत की कमी थी॥   यह दिल तॊ आपका है, हम आपको क्या दावत दें शायद हमारी  मेहज़बानी  में   इजाज़त  की  कमी थी॥   इशारॊं में आशिकी जताना हमारी आदत नहीं शायद हमारी नज़रों में नज़ाकत की कमी थी॥   अपनी तौर-ऒ-तेह्ज़ीब दिल में भरी है शायद हमारे तरीकॊं में शराफ़त की कमी थी॥   मेरे तराने आपके अरमान न छॆड पाये शायद हमारे लफ़ज़ॊं में शरारत की कमी थी॥   आपके सिवाय हमने किसी और को चाहा ही नहीं शायद हमारी मोहब्बत में ज़रूरत की कमी थी॥